यह मेरी असली सच्ची कहानी है जो मैं हमेशा से छुपाकर रखना चाहती थी, लेकिन अब लगता है कि शेयर करने का समय आ गया है। मेरा नाम प्रिया है और मेरी छोटी बहन का नाम नेहा…
यह मेरी असली सच्ची कहानी है जो मैं हमेशा से छुपाकर रखना चाहती थी, लेकिन अब लगता है कि शेयर करने का समय आ गया है। मेरा नाम प्रिया है और मेरी छोटी बहन का नाम नेहा है। हम दोनों उस समय कॉलेज में थीं, मैं 20 साल की और नेहा 19 की। हमारा परिवार जयपुर में रहता है, पापा-मम्मी बहुत सख्त हैं, लेकिन हम बहनें थोड़ी शरारती और जिज्ञासु थीं। कुछ दिन पहले हमने रात को छुपकर कुछ रोमांचक किया था जिससे हम और गर्म हो गई थीं, और अब हम बाहर निकलकर कुछ नया अनुभव चाहती थीं।
सुबह उठते ही मम्मी ने हमें नाश्ते के लिए बुलाया। हम दोनों ने साथ में नहाया, कपड़े पहने और नीचे गईं। नाश्ता करते हुए मैंने धीरे से मम्मी से पूछा कि आज शाम को हम बाहर जा सकते हैं क्या? मम्मी ने पूछा क्यों, क्या काम है? मैंने कहा शॉपिंग करनी है कुछ पर्सनल सामान। मम्मी बोलीं पापा से लिखवा दो वो ले आएंगे। तभी नेहा बोल पड़ी नहीं मम्मी, वो सामान पापा नहीं ला पाएंगे। मम्मी समझ गईं कि लड़कियों का पर्सनल सामान है।
फिर मम्मी ने कहा ठीक है, मैं ले आऊंगी, लिस्ट दे दो। हम दोनों एक साथ बोलीं नहीं मम्मी! मम्मी चौंकीं और पूछा क्यों? मैंने नेहा को शांत किया और कहा हम खुद ले आएंगे, चिंता मत करो। मम्मी बोलीं पिछली बार की घटना भूल गईं क्या, अब अकेले नहीं जाने दूंगी। मैंने कहा मम्मी, उस डर से तो जिंदगी भर घर नहीं बैठ सकते। अब हम उस डर को खत्म करने ही बाहर जाना चाहते हैं। मम्मी सोच में पड़ गईं और बोलीं ठीक है, लेकिन मैं भी साथ चलूंगी।
मैंने झट से झूठ बोला कि नहीं मम्मी, हमारे साथ दिल्ली की कुछ फ्रेंड्स भी आ रही हैं। मम्मी चौंकीं, दिल्ली में फ्रेंड्स? मैंने कहा हां, मेरी पुरानी फ्रेंड की कजिन यहां रहती है, वो हमें पिक कर लेगी। मम्मी को वो फ्रेंड याद थी, सो मान गईं। बोलीं ठीक है, लेकिन देर मत करना, मोबाइल ऑन रखना और यहीं ड्रॉप करवाना। हम खुश हो गएं। नेहा तो इतनी खुश कि रूम में जाकर मुझे किस कर लिया और बोली तू तो कमाल की बहाने बनाती है!
शाम हुई, मैंने टाइट ब्लैक टॉप और ग्रे लेगिंग्स पहनी जो मेरे चूतड़ों को पूरी तरह हाइलाइट कर रही थीं। नेहा ने पिंक क्रॉप टॉप और छोटी डेनिम स्कर्ट पहनी, उसकी गोरी जांघें साफ दिख रही थीं। मम्मी हमें गेट तक छोड़ने आईं, समझाती रहीं सावधान रहना, कुछ प्रॉब्लम हो तो फोन करना। हम बोलीं ठीक है और निकल पड़े। नेहा बहुत एक्साइटेड थी, लेकिन मुझे थोड़ा डर भी लग रहा था कि बस में क्या होगा। हम मेट्रो पकड़ी और दिल्ली के एक व्यस्त बस स्टैंड पर पहुंचे।
वहां काफी भीड़ थी। हम बस का इंतजार करने लगे। पहली बस आई, पूरी पैक, हम चढ़ गए लेकिन कुछ हुआ नहीं। नेहा निराश होकर बोली कुछ नहीं होगा यहां, उतर जाते हैं। हम उतर गए। कई बसें आईं, लेकिन कुछ खास नहीं हुआ। अंधेरा होने लगा, मम्मी के फोन आने शुरू हो गए। हम दोनों निराश, मैंने कहा चल घर चलते हैं, फिर कभी ट्राई करेंगे। नेहा मान गई। हमने घर की बस पकड़ी, वो भी पैक थी, सिर्फ खड़े होने की जगह। ज्यादातर औरतें और बड़े लोग।
हम एक सीट के पास खड़े हो गए जहां एक 45 साल की आंटी अपनी बेटी के साथ बैठी थीं, जो हमसे थोड़ी छोटी लग रही थी। उनके पति हमारे पास खड़े थे। नेहा का मूड ऑफ था। मैं मम्मी से फोन पर बात कर रही थी कि जल्दी आ रहे हैं। तभी मुझे अपने चूतड़ पर कुछ फील हुआ। नीचे देखा तो आंटी के पति अंकल का हाथ मेरे चूतड़ पर था। शायद गलती से, लेकिन फिर धीरे-धीरे सहलाने लगे। मैं चुप रही, देखती हूं क्या करते हैं। मेरी चुप्पी देख उनकी हिम्मत बढ़ी, पूरी हथेली से मेरे चूतड़ मसलने लगे। गर्मी मेरी लेगिंग्स से होते हुए अंदर तक पहुंच रही थी।
तभी देखा आंटी नेहा की जांघों को कोहनी से रगड़ रही थीं, लेकिन नेहा उदास थी, नोटिस नहीं कर रही। मैंने नेहा को इशारा किया। वो समझ गई और मुस्कुराई। हम जगह बदल लीं। अंकल घबरा गए थे, दूर हट गए। लेकिन आंटी ने हिम्मत दिखाई, अब मेरी जांघें सहलाने लगीं। धीरे-धीरे अंदरूनी जांघों तक, फिर चूतड़ों तक। मैं मुस्कुराई तो वो भी। बोलीं बेटा मेरे पास बैठो। मैंने मना किया तो बोलीं अपनी बेटी को गोद में बिठा लूंगी। उनकी बेटी उठी और गोद में बैठ गई, जैसे छोटी बच्ची। मैं बैठ गई।
अब आंटी का हाथ मेरी जांघों पर, टीशर्ट के अंदर से लेगिंग्स पर चूत को टच करने लगा। उंगलियां फांक पर रगड़ रही थीं, मेरी चुत गीली हो गई। मैं खिड़की बाहर देख रही थी। उनकी बेटी ने मेरे बूब्स दबाने शुरू कर दिए। मैं समझ गई पूरी फैमिली ठरकी है। उधर अंकल ने नेहा की स्कर्ट के अंदर हाथ डाल दिया, पैंटी पर चूतड़ मसल रहे थे। नेहा की सांसें तेज, चेहरा लाल हो गया।
बस खाली होती गई, सिर्फ हम, वो फैमिली, ड्राइवर और कंडक्टर बचे। आंटी ने मेरी लेगिंग्स नीचे सरकाई, पैंटी साइड की, उंगली चुत में डाल दी। मैं कांप गई, आह निकल गई। उनकी बेटी ने मेरे बूब्स निकालकर चूसने शुरू कर दिए। अंकल ने नेहा को दीवार से सटा लिया, स्कर्ट ऊपर की, पैंटी नीचे, अपना लंड निकाला और नेहा की चुत पर रगड़ने लगा। नेहा की आंखें बंद, मुंह से आह्ह्ह निकल रही थी।
आंटी बोलीं अंकल से, इन दोनों को आज मजा दे दो। अंकल ने नेहा की चुत में लंड का टोपा घुसाया। नेहा चीखी, लेकिन आंटी ने मुंह बंद कर दिया। धीरे-धीरे पूरा लंड नेहा की कुंवारी चुत में घुस गया। खून निकला, नेहा रो रही थी लेकिन मजा भी आ रहा था। अंकल नेहा को चोदते रहे, ठपठप की आवाज बस में गूंज रही थी। नेहा की चुदाई देख मैं और गर्म हो गई। आंटी ने मुझे सीट पर लिटाया, अपनी साड़ी ऊपर की और मेरे मुंह पर चुत रख दी। मैं चाटने लगी। उनकी बेटी मेरी चुत चाट रही थी।
फिर अंकल ने मुझे पकड़ा, मेरी लेगिंग्स उतारी और मेरी चुत में अपना मोटा लौड़ा घुसाया। दर्द हुआ, लेकिन फिर मजा आने लगा। अंकल जोर-जोर से चोदते, मेरी चुत फट रही थी। नेहा आंटी की चुत चाट रही थी, आंटी की बेटी नेहा को उंगली कर रही थी। कंडक्टर और ड्राइवर भी रुक गए, बस साइड में पार्क की और शामिल हो गए। कंडक्टर ने नेहा को चोदा, ड्राइवर मेरी गांड में लंड डालने लगा। हम दोनों बहनें पूरी चुदक्कड़ बन गईं, सबके लंड चूसतीं, चुदवातीं।
पूरा ग्रुप सेक्स चला, सबने हमें हर पोजिशन में चोदा। हमारी चुत और गांड से रस और वीर्य बह रहा था। आखिर में सब झड़ गए। आंटी ने हमें कपड़े ठीक करने को कहा, बस घर के पास छोड़ दी। हम घर पहुंचे, मम्मी को कुछ नहीं बताया। लेकिन अब हम हर हफ्ते ऐसी बस ट्रिप प्लान करती हैं।
यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।”
— Hindi Sex Stories


Sach mein dil ko chu gayi ye kahani.
First time is site pe aaya, ab roz aaunga.
Kahani mein emotion bhi tha aur maza bhi, badhiya combo.
Story bahut acchi thi, likhne ka andaz kamaal hai.
Author ne bahut mehnat se likha hai, samajh aa raha hai.
Bahut badiya story hai, maza aa gaya padh kar!