यह बात तब की है जब मैं 12वीं में पढ़़ती थी. मैं एक को-एड स्कूल में पढ़़ती थी जिस में लड़के और लड़कियाँ दोनों साथ में पढ़़ते हैं और हमारे स्कूल में लड़के पैंट शर्ट और…
यह बात तब की है जब मैं 12वीं में पढ़़ती थी. मैं एक को-एड स्कूल में पढ़़ती थी जिस में लड़के और लड़कियाँ दोनों साथ में पढ़़ते हैं और हमारे स्कूल में लड़के पैंट शर्ट और लड़कियाँस्कर्ट शर्ट पहनते हैं टाई के साथ. वो मेरे स्कूल के सबसे सुनहरे दिन थे. मैं अपनी क्लास में सबसे सुंदर थी, ऐसा मुझे कई लड़के कह चुके थे पर मैं ये बात किसी और के मुंह से सुनना चाहती थी.
हाँ ! आईने के सामने खड़े हो के ख़ुद को निहारती भी थी कभी बालों को समेटती कभी बिखेरती कभी अपनी माँ का बलोउस और पेटीकोट पहन के साड़ी पहनने की कोशिश करती तो कभी फव्व्वारे के नीचे अपनी नाईटी पहन के नहाती !!
उन दिनों मैं अपने यौवन के शिखर पे थी मेरे उभरते हुए स्तन और खूबसूरत जांघें सबको लुभाती थी.. मेरी क्लास के सभी लड़के मुझ पे जान छिड़कते थे..पर मैं 12वीं में पढ़ने वाले एक लड़के को बेहद पसंद करती थी उसका नाम वरुण था वो बेहद स्मार्ट और हैंडसम था. उसकी हाईट करीबन 6 फीट रही होगी और मैं 5.6 फीट की थी पर हील्स पहन के उसके कंधे तक पहुँच ही जाती थी।
उन्ही दिनों टीचर्स डे आने वाला था.. दो दिन पहले नाम अनोउंस हुए चूंकि उसकी क्लास में कम लड़कियाँथी तो हमारे क्लास से लड़कियों को टीचर्स बनने का प्रस्ताव आया. मेरे गैर मौजूदगी में मेरे क्लास के कुछ शरारती लड़कों ने मुझे साड़ी में देखने के लिए लिस्ट में मेरा नाम लिखवा दिया और उस दिन 5 सितम्बर को टीचर बनी…
मैंने व्हाइट कलर की साड़ी पहनी थी जिसमें गुलाबी और हलके जामुनी रंग के खूबसूरत फूल थे और व्हाइट ब्लाउज जिसका गला बेहद डीप था चूँकि वो माँ का था इसीलिए मुझे उसे थोड़ा टाइट करना पड़ा था. पर गला तो बदला नहीं जा सकता था इसीलिए मुझे ऐसे ही पहन ना पड़ा. उस ब्लाउज का गला V आकार का था और बेक लेस था जिस वजह से मैं ब्रा भी नहीं पहन पाई. पेटीकोट बहुत बड़े घेरे होने की वजह से मैंने अंदर एक टाइट जींस पहनी थी और फ़िर साड़ी बंधवाई माँ से, ताकि मैं पतली और लम्बी लगूँ..
फ़िर मैंने अपने जांघो को चूमते लंबे बाल खोले और आधे बांधे, हलकी सी न्यूड लिपस्टिक और मस्कारा, लाइनर लगाया और पहुँच गई स्कूल सुबह 8 बजे. क्लास्सें 9 बजे शुरू होनी थी.. और असेम्बली में टीचर्स मीट होनी थी असली और नकली दोनों की, ताकि हम अपनी टीचर को थंक्स कह सकें।
मैं अपनी टीचर के लिए एक रेड रोज़ लायी थी और एक कार्ड. मैंने घोषणा के वक्त सुना वरुण मेरे साथ ही था यानि वरुण और मैं एक ही टीचर बने थे चूंकि हमारे स्कूल मैं एक क्लास में 50 बच्चे पढ़ते थे और एक बन्दे का 50 बच्चों को संभालना काफी मुश्किल होता तो टीचर्स ने एक क्लास के लिए दो टीचर बनाये।
मैं काफी उत्साहित थी और नर्वस भी कि आज मैं सारा दिन वरुण के साथ रहूंगी. जब मैं अपनी टीचर से मिलने गई, उन्हें थंक्स कहने के लिए तो वो भी मेरे साथ था. मैंने वो गुलाब जो मैं अपनी टीचर के लिए लायी थी उन्हें देने की बजाये वरुण को दे दिया गलती से नर्वसनेस में.. और वो जोर जोर से हँसने लगा. फ़िर कहने लगा थंक्स वैसे ये तुम्हारे बालों पे ज्यादा खिलेगा.. और मेरे बालों में फूल लगते हुए वो बोला.. नाऊ यू आर लूकिंग गोर्जियस..!!
मैं बेहद खुश थी उसने मुझे गोर्जिअस कहा.. फ़िर हम लोगों को अपना टाइम टेबल दिया गया उस दिन के लिए और हम अपनी फर्स्ट क्लास लेने के लिए 11वीं क्लास में पहुँच गए मैंने जैसे ही क्लास में कदम रखा, मैं ठोकर खाकर गिरने लगी थी क्यूंकि मेरा सारा ध्यान तो वरुण पे था.. क्यूंकि वो एक दम मेरे सपनों के राजकुमार जैसा लग रहा था काला कोट, काली टाई, हलकी जामुनी फोर्मल शर्ट में, सच, मैं अपने होश में नहीं थी।
अचानक से वरुण ने मुझे थामा और गिरने से बचाया.. अपने पैरों पे खड़े होते हुए मैंने उसे थंक्स कहा और वो मुस्कुराते हुए बोला माय प्लेजर ! तभी पीछे से क्लास के एक लड़के ने कमेन्ट किया अरे वाह क्या जोड़ी है जामुन और जामुनी की और वरुण ने उस लड़के को ये कहते हुए देख लिया और उसे क्लास के बाहर खड़ा कर दिया… और बच्चों को पढ़ाने लगा. तब मुझे पता चला कि वो देखने में ही नहीं पढ़़ाई में भी बेहद होशियार था। मैं सच मुच उसकी दीवानी होती जा रही थी. कई बार उसने मुझे उसे निहारते हुए देखा पर देख कर अनदेखा कर दिया. इसी तरह 2 पीरियड गुजर गए, तीसरा पीरियड खाली था।
तो हम दोनों स्टाफ रूम में चले गए वहां कोई नहीं था हम दोनों के सिवा, वहां मैं सर झुकाए बैठी थी. और एक नोवेल पढ़ रही थी. कि अचानक से वरुण ने पूछा- तुम्हारा नाम क्या है? मैंने कहा आपको मेरा नाम भी नहीं मालूम और हम इकठे काम कर रहे हैं तो कहने लगा- बताओगी नहीं तो पता कैसे चलेगा… तो मैंने कहा पूछोगे नहीं तो क्या मुझे सपना आया कि तुम्हें मेरा मतलब आपको मेरा नाम नहीं मालूम. तो उसने मुझे बीच में टोकते हुए कहा- ठीक है तुम मुझे तुम कह कर बुला सकती हो, मैं काफ़ी खुले विचारों का हूं। मैंने कहा.. अच्छा.. कितना खुला है तुम्हारा मन.. तो वो हसने लगा
मैंने कहा मैंने कोई जोक नहीं मारा है तो कहने लगा- रहने दो तुम अभी नादाँ हो.. और मैं चुप हो गई और नोवेल पढ़ने लगी. उसने फ़िर कहा- ये साड़ी तुम्हारी अपनी है? मैंने कहा- नहीं माँ की है. और फ़िर उसे टोकते हुए कहा कि मुझे नोवेल पढ़ने दो मुझे पसंद नहीं कि कोई मुझे पढ़़ते हुए डिस्टर्ब करे. तो वो नाराज़ हो के वहां से उठ के चला गया. मुझे बहुत ग्लानि महसूस हुई कि मैंने उस से ऐसा कहा. इतनी मुश्किल से तो मैं उसका साथ पा सकी हूँ वो भी एक दिन के लिए उसमें भी मैंने उसे नाराज़ कर दिया. तो मैंने अपनी नोवेल वहीँ छोड़ी और उसके पीछे भागते हुए गई और उसे दूर से कहा- एक्सक्यूज़ मी ! आई एम् सॉरी फॉर बीइंग रयुड टू यू । आप मुझसे नाराज़ हो?
उसने कहा हाँ.. मैंने फ़िर कहा सॉरी तो कहने लगा कि मैं तुमसे उस बात पे नाराज नहीं हूँ इस बात पे नाराज हूँ कि तुमने मुझे आप कहके बुलाया और. हलके से मुस्कुराते हुए शरारत भरे लफ़्ज़ों में बोला- मैं खूबसूरत लड़कियों से न तो नाराज़ होता हूँ न ही उन्हें नाराज़ करता हूँ. मेरे मन में लड्डू फ़ूट रहे थे कि उसने मुझे खूबसूरत कहा और मेरे चेहरे पे खुशी झलकने लगी जो उसने भी नोटिस की. फ़िर कहने लगा इतनी खुश मत हो मैंने तुम्हे खूबसूरत नहीं कहा और मेरा सारा मूड ऑफ़ कर दिया.
मैं मुड़ के वापिस स्टाफ रूम में जाने लगी कि पीछे से उसने मुझे आवाज़ लगायी… कृति !!! तुम्हारा नाम क्या है..!!!
मैंने कहा तुम्हे मेरा नाम मालूम है तो पूछा क्यूँ था.. कहने लगा मुझे मालूम है कि तुम थोडी सी शोर्ट टेम्पेरेड हो इसीलिए तुम्हे तंग कर रहा था. मैंने कहा.. मैं शोर्ट टेम्पेरेड ही नहीं कराटे चैम्प भी हूँ. इसीलिए बचके रहना. फ़िर बोला कि तुम कराटे चैम्प होगी पर मैं प्रेम पुजारी हूँ फ़िर मैं शरमा के स्टाफ रूम में चली गई थोड़ी देर में हमारा चौथा पीरियड लगने वाला था।
जैसे ही वरुण स्टाफ रूम में आया मैं उठ के जाने लगी और मेरी साड़ी का पल्लू उसके कोट के बटन में अड़ गया. अच्छा हुआ मैंने उसे पिन अप कर रखा था. उसने पल्लू छुड़वाया और मैं भागते हुए क्लास में चली गई पर पल्लू छुडाते वक्त मैंने उसके होंठो पे आती मुस्कराहट साफ देखी और 5 मिनट बाद वो भी क्लास में आया.
मैं क्लास में खड़ी थी अंदर आते हुए उसने कहा- बच्चों आज पढ़़ाई का मूड है.. सब ने जोर से चिल्लाते हुए कहा- नहीं ! और क्लास को दो हिस्सों में बाँट दिया एक तरफ़ लड़के और वो और दूसरी तरफ़ लड़कियाँऔर मैं और हम अन्ताक्षरी खेलने लगे.!!! खेलते खेलते उनकी बारी आई अक्षर था प तो उन्होंने मेरी तरफ़ देखते हुए गाना शुरू किया प्यार के लिए चार पल कम नहीं थे कभी तुम नहीं थे कभी हम नहीं थे…
मैंने शरमा के नज़रें झुका ली थोड़ी देर बाद मेरी बारी आई गाने की मेरा अक्षर था डी तो मैंने गया दिल दे दिया है जान तुम्हे देंगे, दगा नहीं करेंगे सनम, इसी तरह से खेल चलता रहा और हम दोनों अपने दिल के एहसासों को गानों में बयाँकरते रहे. इसी तरह वक्त गुज़र गया और रिसेस की घंटी बजी. सभी बच्चे शोर करते हुए बाहर चले गए और मैं अपनी साड़ी समेटते हुए खड़ी हुई. वरुण मुझे ही देख रहा था और मैंने जान बूझ कर ध्यान नहीं दिया.
मैं क्लास से निकलने लगी तो कहने लगा- तुम कहाँ स्टाफ रूम में खाना खाओगी क्या. मैंने कहा- हाँ ! तो कहने लगा कि इस टाइम पूरा स्टाफ रूम फुल होगा मैंने कहा तो क्या हुआ और जाने लगी तो कहने लगा कि मैं तुमसे कुछ बात करना चाहता हूँ. तो मैंने कहा कि करो तो कहता कि वो मैं तुमसे कहना चाहता हूँ कि आई.. आई… आई लव… आई लव… मैंने कहा- आगे भी कुछ बोलोगे अब.. तो कहने लगा कि… आई लव बुक्स !!!
मैंने कहा- यूऽऽऽ..!!!! मैं जा रही हूं और स्टाफ़ रूम की तरफ़ जाने लगी तो कहने लगा- अरे रुको मैं भी आता हूँ ना तुम्हारे साथ…!! मैंने कहा- अपने आप आ जाना, मैं जा रही हूँ. और स्टाफ रूम में आ गई .. वहां कुछ और ही माहौल था, लड़कियाँ साड़ी ठीक कर रही थी और मेक अप कर रही थी और अपनी साडियाँ लड़कों से ठीक करा रही थी .. ये सब देख के मुझे और गुस्सा आ गया और मैं वरुण के पास वापिस चली गई.
मेरे पहुँचने पे वो कहने लगा देख लिया तमाशा इसीलिए मैं मना कर रहा था .. पर मेरी तो ना मानने की ठान रखी है तुमने .. तो मैंने कहा अच्छा ना सॉरी ! .. कहता सॉरी बोल के एहसान कर रही हो… और मेरा हाथ पकड़ के उसने मुझे दीवार की तरफ़ धक्का दिया और कहने लगा- मैं तुमसे उमर में भी बड़ा हूँ और सोच में भी, दुनिया तुमसे ज्यादा देखी है,…तुम्हें क्या लगता है तुम कोई हूर की परी हो जिसके लिए लड़के मरते हैं?
तो मैंने कहा मेरा हाथ छोड़ो मुझे दर्द हो रहा है। छोड़ते हुए उसने मुझे सॉरी कहा और फ़िर सारा दिन मैंने उस से बात नहीं की. स्कूल टाइमिंग्स के बाद टीचर्स के लिए स्कूल में लंच था लंच कराने के बाद जब में स्कूल से निकलने लगी तो जोर जोर से बारिश शुरू हो गई। मैं पूरी तरह से भीग गई और मेरे ब्लाउज़ व्हाइट होने की वजह से अंदर के मेरे स्तन साफ दिखने लगे. मुझे भीगते हुए रिक्शा का इंतज़ार करते देख वरुण ने मुझे बाईक पे घर छोड़ने की ऑफर दी और मैंने कोई और रास्ता ना दीखते हुए उसे हाँ कर दी.
मेरी साड़ी भीगने की वजह से जींस के साथ एक दम चिपक गई थी और जींस दिखने लगी थी तो मुझे वरुण ने कहा तुम साड़ी उतार दो ..और जींस में बैठ जाओ .. मैं तुम्हे अपने घर ले चलता हूँ वहां ब्लाउज चेंज़ करके मेरी टी शर्ट पहन के घर चली जाना तब तक बारिश भी कम हो जायेगी . इसीलिए वो मुझे अपने घर ले गया मेरे भीगे बाल मेरे बदन से चिपके हुए थे जैसे पेड़ से कोई लट चिपकी होती है और मेरी जींस पूरी तरह भीग चुकी थी .. मेरे व्हाइट ब्लाउउज़ में से मेरे स्तन साफ नजर आ रहे थे. उसने मुझे घर के अन्दर बुलाया और एक टॉवेल दिया .. और पूछा कि तुम्हारे पास और कपड़े नहीं हैं क्या.
मैंने कहा- नहीं !
तो उसने मुझे अपनी टी शर्ट दी। वो बेहद खुली थी, उसके अंदर से मुझे उसके बदन की खुशबू भी आ रही थ। मैं अपनी टांगे पोंछ रही थी तो वरुण मेरे पास आकर खड़ा हो गया और मेरे चेहरे पे फिसलते मेरे बालों को ऊपर करने लगा ताकि मैं अच्छे से अपना बदन पोंछ सकूँ। मेरे ब्लाउज में से मेरे स्तन ऊपर की ओर झांक रहे थे।
फ़िर मैं खड़ी हुई और बाथ रूम में चली गई चेंज करने के लिए पर मेरे ब्लाउज की डोरियों तक मेरे हाथ नहीं पहुँच रहे थे कि मैं उन्हें खोल सकूँ. और घर में वरुण के सिवा कोई और नहीं था, तो मैंने उसे मदद के लिए बुलाया। उसने कहा क्या हुआ .. मैंने कहा कि मेरे ब्लाउज कि डोरी नहीं खुल रही, तो उसने डोरी पकड़ के खींची और खोल के बाहर चला गया..
मुझे उसकी ये बात बहुत अच्छी लगी कि उसने अकेलेपन का कोई ग़लत फायदा नहीं उठाया. मैंने उसकी दी हुई टी शर्ट पहनी और घर चली गई. उसकी बाईक पे बैठ के। उसके बाद से हम दोनों के बीच अच्छी खासी दोस्ती हो गई.
और अब तक हम दोनों खूब मस्ती करते हैं.
ये हम दोनों की प्रेम कहानी की सिर्फ़ शुरुआत थी. बाकी के किस्से में आप सभी को इस कहानी के दूसरे अंको में बताउंगी. हमारी प्रेम कहानी में भी वो सब कुछ हुआ जो हर प्रेम कहानी में होता है लेकिन कुछ अलग अंदाज़ से. तो आप लोगों को कैसी लगी मेरी कहानी ये मुझे ई मेल करके जरूर बताइयेगा, मुझे आपके फीडबैक का इंतज़ार रहेगा .. अगर आपको ये शुरुआत पसंद आई तभी मैं इस सच्ची कहानी को आगे बढाउंगी. पढ़ने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया.
— Antarvasna
Bohot real lagi ye story, dil khush ho gaya.
Superb likha hai bhai, agla part kab aayega?
Full paisa vasool story! Keep writing.
Waah kya likhte ho yaar, next part jaldi dalo.
Ye kahani save kar li maine, dobara padhunga.
Bohot real lagi ye story, dil khush ho gaya.
Itni lambi kahani bhi bore nahi hui, likhne ka talent hai aapme.
Real experience jaisa laga padh kar.
Author ne bahut mehnat se likha hai, samajh aa raha hai.
Likhte raho aise hi, hum padhte rahenge.
Ye kahani save kar li maine, dobara padhunga.
Bahut din se aisi story dhundh raha tha, mil gayi finally.
Story short thi par impact bahut zyada tha.
Kya twist tha kahani mein, maza aa gaya.