लेखक : जो हन्टर
लेखक : जो हन्टर
सहयोगी : कामिनी सक्सेना
घर पर खाना खाते खाते शाम के सात बज गये थे। मैने जो से कहा – “जल्दी करो वर्ना रात ज्यादा हो जायेगी…… फिर तुम्हारे पुराने वाले मकान को भी तो देखना है…”
अन्दर से मां बोली…- “उस पुराने मकान में मत जाना… सुबह जाना वहां पर…।”
“बस बस…ठीक है… हो गया…… ये बैग रख लो……”
जो जल्दी से उठा और कुछ सामान पेक किया और बोला,”चलो कामिनी ……”
हम दोनो ने अपना अपना सामान उठाया और नीचे आ गये। कार में सामान रखा और जो ने कार स्टार्ट कर दी।
“पहले समुन्दर के किनारे बीच पर चलते हैं……” मैं खुश थी कि आज बीच की सैर करने को मिलेगी। गाडी बीच की तरफ़ चल दी। मुझे लगा कि शायद बरसात होने वाली है। मैने मायूसी भरे शब्दों में कहा, “यार जो…… बरसात हो जायेगी तो फिर क्या मजा आयेगा………”
“नहीं होगी……यहां तो हमेशा ऐसा ही रहता है।”
लेकिन किस्मत खराब ही थी। बाहर वर्षा की फ़ुहारें पडने लगी थी। अचानक जो ने मुख्य सडक छोड दी। और एक सुनसान सी रोड पर आ गया।
“तुम ठीक कहती हो …… बारिश चढ रही है…… लगता है कुछ ही देर में तेज बरसात होने वाली है………”
एक बडे और सुन्दर मकान के सामने जो ने गाड़ी रोकी…… गेट कीपर अपना छाता लिये भाग कर आया …… करीब 65 साल का वो होगा…… कार में झान्कते हुए बोला…”साहब…किससे मिलना है……।”
“यहां एक पुराना बन्गला था……डा हन्टर का …कितनी दूर है……”
“यही है ………आप कौन है…?” जो ये सुन कर चकरा गया… मै जो को देख रही थी……वो कुछ परेशान सा दिखने लगा।
” मैं डा हण्टर का सबसे छोटा बेटा ……… जो हूं………”
“अरे…… जो बाबा ………आओ…आओ…उसने भाग कर मुख्य फ़ाटक खोल दिया …… बरसात तेज हो चुकी थी…। जो बडी असमन्जस की स्थिति में दिख रहा था। उसने गाड़ी मोड़ी और गेट के अन्दर कार लाकर सीधे पोर्च में छज्जे के नीचे खडी कर दी। बूढा गेट कीपर भी धीरे धीरे भागता हुआ आ गया … वो इतने में ही हांफ़ने लगा था।
“वो पुराना बन्गले का क्या हुआ……”
“वो तो डाक्टर साहब ने मरने से पहले ठीक करवाने को कहा था …… उसके लिये उन्होने जरूरत से ज्यादा पैसा दिया था………”
हम दोनो घर के अन्दर आ गये …… मेरी आंखे उसे देख कर फ़टी रह गयी………
“जो…… तुम यहां क्यों नहीं रहते हो…” गोवा की पुरानी इमारतें जिसे हेरीटेज प्रोपर्टीज कहते है… प्रसिद्ध हैं। पर जो भी उनमें से एक का मालिक है …मुझे नहीं पता था। इतने में मुझे उपर के कमरे में कुछ हलचल दिखाई दी…… बूढा भांप गया था।
“मेरा लड़का और बहू हैं………आपके कमरे की सफ़ाई कर रहे हैं…मैं आप के लिये कोफ़ी बना कर लाता हू…” बूढा बाहर चला गया।
जो उठा और ऊपर कमरे की ओर जाने लगा। मैं भी लपक कर जो दे साथ हो ली। सीढियां चढ कर जैसे ही हम खिडकी के पास पहुन्चे…… हमारी नजर खिडकी के अन्दर पडी। एकबारगी हम देखते रह गये। बूढे का लडका और बहू काम-क्रीड़ा में लिप्त थे। लडकी ने अपने दोनो हाथ सर पर रखे थे और अपने नन्गी चूंचियां आगे उभार कर आंखे बन्द करके खडी थी… और लडका उसके उरोजों को दबा रहा था…… मैने जो की बाहें कस कर पकड ली… लडके का लन्ड खडा था। वो लडका कुछ देर तक तो चूंचियों से खेलता रहा फिर उससे लिपट गया और अपने लन्ड को उसकी चूत पर मारने लगा।
नीचे कुछ आहट सुनाई दी… हम तुरन्त बिना किसी आवाज के नीचे आ गये। कोफ़ी आ गयी थी। ऊपर जो देखा था उससे मेरे दिल में वासना जागने लगी थी। बूढा कह रहा था –
“साहब… बाहर तो बरसात ……तेज हो गयी है … रात को यहीं रुक जाईये… कुछ चाहिये तो बेल हर रूम में है…बुला लीजियेगा…।” बूढा वहां से बाहर गेट पर अपने कमरे मे चला गया।
मैं थोडा रंग में आ रही थी… मैने जो का हाथ दबाया …जो ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया। उसने अपने होन्ठ मेरे होन्ठों से लगा दिये। मेरे उरोजों को हल्के हल्के दबाने लगा। मुझे लगा कि कोई कमरे में है। मैने जो को अलग किया तो देखा वोही युगल जो कमरे में था मेरे सामने खडा था … मैं शरमा गयी। वो दोनो सामने खडे मुसकरा रहे थे।
“तुम यहां क्या कर रहे हो …… तुम कौन हो…”
” जी…मालिक मैं उनका दामाद हू ये उनकी लड़की है …” मैं समझ नहीं पाई…वो तो बहू और लडके की बात कर रहा था।
लडकी… ने इशारा किया तो वो बोला …
“मालिक… आप आये हैं है तो……ये आपकी सेवा करना चाहती है…और आपकी इच्छा हो हो तो मैं मालकिन कि सेवा कर दूं……” दोनो की मतलबी निगाहें कुछ इशारा कर रही थी।
“साफ़ साफ़ कहो …… हम किसी बात का बुरा नहीं मानते हैं…” मैं उनके इशारों को भांपते हुए बोली…
लडके ने जो के पास आ कर जो के कान मे कुछ कहा। जो ने लड़की को ऊपर से नीचे तक देखा … फिर मेरे से कहा …
“कामिनी ये कह रहा है कि ……ये रोज़ी को मेरे साथ मजे लेना है …… और तुम चाहो तो… सैम के साथ एन्जोय कर सकती हो…”
‘वोऊऽऽऽऽऽऽऽ …जो क्या बात है………पर तुम्हे कोई………”
” कामिनी जिन्दगी के मजे मिल रहे हैं तो ……भरपूर लो… आज की ही तो बात है………कुछ चेन्ज हो जाये…”
मेरे तो शरीर में सनसनी दौड़ गयी। नया माल……नया लन्ड… नई चुदाई…। जो से तो कितनी ही बार चुदा चुकी हूं … मजा आ जायेगा। मैने जो को आंख मार दी……
“तो फिर हो जाये …” इतने में एक आदमी और एक औरत साईड में से निकल कर बाहर चले गये। हमने उस ओर ध्यान नहीं दिया।
हम दोनो ऊपर के कमरे में चले आये। वहां दो शानदार गद्दे वाले बेड थे। हम चारो वहां का खुशनुमा माहौल देख कर फ़ूले नहीं समा रहे थे। मै बाथरूम में गयी और पानी से अपनी चूत और गान्ड साफ़ की और एक बडा तोलिया लपेट कर बाहर आ गयी। मैने देखा तो सैम और रोज़ी अपने पूरे कपडे उतार कर नन्गे खडे थे… सैम का शरीर कसा हुआ था उसका लन्ड भी मोटा और लम्बा था… रोज़ी भी मुझे बहुत सेक्सी लगी… रोज़ी का बदन गुआनी स्टाइल का था … उसके चूतड गोल गोल भरे हुए … पांव थोडे मोटे से छोटा कद ……उसे देख कर किसी भी मर्द का लन्ड खडा हो सकता था। मैं धीरे धीरे सैम के पास आ गयी… उसने मुझे प्यार से किस किया…… मेरा तोलिया उसने उतार कर एक तरफ़ रख दिया। मेरे शरीर फ़िगर देख कर सैम के मुख से आह निकल गयी।
“इतने प्यारे फ़िगर को चोदने को कितना मजा आयेगा…”
मैं तो उसकी ये बात सुनते ही आनन्द से भर गयी… “सेम … तुम भी कुछ कम नहीं हो……”
उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया। उसका शरीर बलिष्ठ था…उसके मसल्स कसे हुये थे… इतने में जो भी आ गया। जो ने अपना तोलिया एक तरफ़ रख कर रोज़ी को अपनि गोदी में बैठा लिया। सैम मुझे एक खिलोने की तरह उठा लिया। उसके ताकतवर शरीर का एक अलग ही मजा आ रहा था। मैने उसकी कमर में अपने पांव कस लिये। उसका लन्ड सीधे मेरी गान्ड पर लग रहा था। मैं उससे एक बेल की तरह लिपटी थी…… मेरे शरीर का बोझ उसे शायद बिल्कुल ही नही लग रहा था…वो मुझे उठाने के बाद भी लोहे की तरह तना हुआ था। मैने उसे तन्ग करने लगी……उसके गले में हाथ डाल कर मैने चूत को उसके लन्ड पर मारने लगी कि उसे बोझ लगे और मुझे उतार दे…पर उसके लोहे जैसे श्रीर पर कुछ असर नहीं हुआ। वो उतना ही आरम से खडा रहा और लन्ड को मेरे चूतडों कि दरारों में लगा दिया…… उसने एक हाथ मेरी चूतड पर रख कर मुझे थोडा सहारा दिया। मैं सोच में पड गयी कि इन्सान है या लोहे का पुतला। मेरे होंठ सैम के होंठो से से जुड गये…… उसके होंठ चूसने में गजब का मजा आ रहा था… उसका लोहे जैसा लन्ड मेरी गान्ड के छेद पर था। मुझे पता चल गया था कि वो मेरी गान्ड ही चोदेगा। मैने भी उसके लन्ड को गान्ड दे छेद पर सही तरीके से लगा दिया।
उसने मेरी चूंचियां बडे ही नरम तरीके से सहलायी। उसके हाथों में जादू था। उसके लन्ड का सुपाडा मेरी गान्ड में घुस गया… मेरी आह निकल गयी… पर तकलीफ़ जरा भी नहीं हुई…उसका लोहे जैसा लन्ड…कितना नरम था, गरम था … पर कड़ाई गजब की थी। मैने कहा- “सेम मुझे उतारो…… बिस्तर पर चोदना ना…”
सेम ने मुझे ऐसे ही लन्ड अन्दर डाले बिस्तर पर यूं रख दिया जैसे कोई खिलोना हो…… उसने तकिया ये कर मेरे चूतड के नीचे लगा दिया। मेरी गान्ड थोडी सी ऊंची हो गयी…… और सैम का काम बन गया। उसने हौले से लन्ड गान्ड में सरकाना चालू कर दिया। उसके मस्त लन्ड पर मैं मर मिटी थी। मीठी मीठी सी गुदगुदी करता हुआ अन्दर तक पूरा बैठ गया। उसने मेरी चूंचियां सहलाते हुए धीरे धीरे मसलना चालू कर कर दिया। मेरी चूत पूरी गीली हो चुकी थी। उसके धक्के बढ्ने लगे……… सैम में जादू था…… उसे चोदने की कला आती थी। उसके धक्के एक ही रफ़्तार से चल रहे थे…… मेरी चूत की हालत खराब हो रही थी…।
“सेम प्लीज़्…… अब मुझे चोद भी दो…।”
सेम मुस्कराया और उसने अपना लन्ड मेरी गान्ड से निकाल लिया……… और चूत के द्वार पर रख दिया। मुझसे रहा नही जा रहा था……
“सेम … घुसेडो ना ………हाय्………जल्दी करो……”
उसने लन्ड अन्दर सरका दिया…… मेरी चूत निहाल हो गयी …… मेरी उत्तेजना बहुत बढ गयी थी …… मुझसे उसका भारी लन्ड नहीं सहा जा रहा था……… मुझे लगा कि मैं झडने वाली हूं ……… और मैं चरम सीमा पर थोडी सी चुदायी के बाद पहुन्च गयी थी……… मेरा पानी छूट पडा…… मै झडने लगी। मैने सुख के मारे अपने होंठ भींच लिया। उसका लन्ड अभी भी लोहे की रोड की तरह कडक था…… वो धीरे धीरे चोदता रहा …… उसे पता था कि मैं झड चुकी हूं। फिर भी उसका जादू भरा लन्ड बहुत धीरे धीरे चुदाई कर रहा था……… कुछ ही देर मैं फिर गर्माने लगी …… चूत फ़िर से फ़डफ़डाने लगी …… मुझ में फ़िर से उत्तेजना भरने लगी……… सैम सब समझ रहा था………कुछ ही देर में धक्को का जवाब धक्को से रही थी। दूसरी ओर ……… जो और रोज़ी का जोश देखते बनता था………।
सेम भी अब उत्तेजना की चरम सीमा पर पहुंचने वाला था……… उसका लन्ड कडकने लगा था……… मुझे साफ़ मह्सूस हो रहा था …… सैम की सारी पहलवानी मेरी चूत में झडने वाली थी। अचानक उसने मुझे जकड लिया और मेरे से लिपट गया……… मेरी चूत ने भी जोर लगाया…… और मैं एक बार फिर झडने लगी……… इतने में सैम क लन्ड फ़ुफ़कार उठा ……… मेरी चूत में उसकी पिचकारी छूट पडी………… उसका कडक लन्ड पिचकारी मारता रहा और ढीला पड गया…… जो और रोज़ी पहले ही झड चुके थे…… तभी बिजली चली गयी। सारे मकान मेइन अन्धेरा छा गया……… बाहर बरसात जम कर हो रही थी……… हमें वैसे भी लाईट का क्या करना था……… दो बार झडने के बाद मैं थक चुकी थी……… इतनी सुन्दर और मनमोहक चुदाई के बाद पूरी सन्तुष्टी के साथ मैं नीन्द दे आगोश में समाने लगी………
सवेरे मेरी आंख खुली…… मैं नन्गी ही सो गयी थी…… अलसायी सी मैने करवट बदली…… मैने जो देखा तो मैं चीख उठी …… मेरी बगल में और कोई नही बल्कि एक नरकंकाल पडा था। जो भी मेरी चीख सुन कर उठ गया…… वो भी दह्शत के मारे चीख उठा उसकी बगल में भी एक नरकंकाल पडा था। वो उछल कर खडा हो गया…… मै भी घबरा कर बिस्तर से नीचे आ गयी।
मैने कमरे को देखा…हम रात भर यहां थे ? … एक पुराना सा कमरा जगह जगह जाले…… धूल से भरा कमरा…… बिस्तर पर मिट्टी…… और… हमने जैसे तैसे कपडे पहने और बाहर भागे…… कमरे से बाहर निकलते ही …… हम सन्न रह गये ……… जो बोल उठा।-” हे भगवान ………ये क्या है…कबाडखाना……चमगादड़ की गन्दगी…… एक अजीब सी बदबू … हम दोनो के चेहरे पर हवाईयां उडने लगी। हम दोनो तेजी से बाहर भागे …… जो फ़ुर्तीला था … मैं पीछे रह गयी…… जो बाहर आते ही कार में बैठा और स्टार्ट कर दी…… उसने दूसरा कार का दरवाजा खोल दिया मैं भागते हुए आयी और कार में बैठ गयी। जो ने गाडी मोडी और बंगले से बाहर आ गया…… मैन रोड पर जो ने कार रोकी …हमने कार से उतर कर देखा …… वो चमचमाता हुआ बंगला कहां गया… उजाड वीराना…… काला…काई से भरा … टूटा फूटा घर ………बडे बडे जन्गली पेड्…झाडियां …… लगता था उसमे बरसों से कोई नही आया …… मैं डर के मारे सिहर उठी ……
“जो… चलो यहां से … मैं लगभग रो पडी…… मैने रात को किसके साथ चुदाई की थी और जो ने…… सैम और रोज़ी कौन थे……… जो स्तब्ध खडा था।
तभी पास से एक आदमी साईकल से निकला …
” भाई साब … ये डाक्टर साब का बंगला है ना……”
” हां… सही पहचाना ………डाक्टर साब ने यहा नौकर की लडकी और उसके हसबेन्ड को मरवा डाला था … उनका दिल नौकर की बेटी पर था…।”
” शट अप … साले कुछ भी बोलने लग जाते है…” पर जो अन्दर ही अन्दर सब समझ गया था…… अनमने मन से वो कार में बैठा और गाडी स्टार्ट कर दी…
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Bhai tumhari likhne ki style alag hi level ki hai.
Superb likha hai bhai, agla part kab aayega?
Ye kahani padh kar bahut accha laga, keep it up.
Story bahut acchi thi, likhne ka andaz kamaal hai.
Kya twist tha kahani mein, maza aa gaya.
First time is site pe aaya, ab roz aaunga.
Ye story mere dost ne bheji thi, ab main bhi fan ho gaya.
Author ne bahut mehnat se likha hai, samajh aa raha hai.
Itni lambi kahani bhi bore nahi hui, likhne ka talent hai aapme.
Kya baat hai bhai, itni achi kahani bahut din baad padhi.
Bahut hi natural lagi kahani, jaise sach mein ho raha ho.
Ye story mere dost ne bheji thi, ab main bhi fan ho gaya.
Yeh site meri favorite ban gayi hai, roz naye stories padhta hoon.
Bohot real lagi ye story, dil khush ho gaya.
Bahut hi natural lagi kahani, jaise sach mein ho raha ho.
Waah kya likhte ho yaar, next part jaldi dalo.
Kahani mein emotion bhi tha aur maza bhi, badhiya combo.
Bahut hi umda kahani thi, thanks for sharing.